योगिनी दशा चक्र

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योगिनी दशा चक्र वह संरचनात्मक ग्रिड है जो सभी 27 नक्षत्रों को एक पुनरावर्ती चक्र में 8 योगिनियों के साथ मैप करता है। यह समझना कि चक्र नक्षत्रों को कैसे वितरित करता है, यह स्पष्ट करता है कि जन्म के समय प्रारंभिक दशा कैसे निर्धारित की जाती है।

8 योगिनियां, स्वामी ग्रह और वर्ष

यह प्रणाली 8 दिव्य स्त्री ऊर्जाओं द्वारा शासित होती है जिन्हें योगिनी कहा जाता है। प्रत्येक योगिनी एक विशिष्ट ग्रह से जुड़ी होती है, उसका एक विशेष स्वभाव (शुभ या अशुभ) होता है और वह कुल 36 वर्षों में से एक निश्चित संख्या के वर्षों पर शासन करती है:

1. मंगला (चंद्र) — 1 वर्ष
• स्वभाव: अत्यंत शुभ
• स्वामी ग्रह: चंद्र (Chandra)
• फल: पारिवारिक सौहार्द, भावनात्मक शांति, मानसिक स्पष्टता, कल्याण और समृद्धि। चक्र की एक सौम्य, अनुकूल शुरुआत।

2. पिंगला (सूर्य) — 2 वर्ष
• स्वभाव: सौम्य अशुभ
• स्वामी ग्रह: सूर्य (Surya)
• फल: महत्वाकांक्षा, करियर की प्रेरणा और अधिकार में वृद्धि, लेकिन यह शारीरिक ताप, बुखार, उच्च अधिकारियों के साथ मामूली टकराव या बेचैनी ला सकती है।

3. धान्या (गुरु) — 3 वर्ष
• स्वभाव: अत्यंत शुभ
• स्वामी ग्रह: गुरु (Guru)
• फल: प्रचुर वित्तीय लाभ, उच्च शिक्षा, मांगलिक पारिवारिक कार्यक्रम, व्यवसाय का विस्तार और आध्यात्मिक विकास।

4. भ्रामरी (मंगल) — 4 वर्ष
• स्वभाव: अशुभ
• स्वामी ग्रह: मंगल (Mangal)
• फल: स्थान परिवर्तन, बेचैनी भरी यात्राएं, अचानक बदलाव, प्रतिस्पर्धी तनाव और जल्दबाजी। ऊर्जा पर नियंत्रण और विवादों से सावधानी की आवश्यकता होती है।

5. भद्रिका (बुध) — 5 वर्ष
• स्वभाव: शुभ
• स्वामी ग्रह: बुध (Budha)
• फल: शैक्षणिक सफलता, करियर में उन्नति, प्रभावी संवाद, तीव्र व्यावसायिक सूझबूझ, सामाजिक प्रतिष्ठा और समग्र कौशल विकास।

6. उल्का (शनि) — 6 वर्ष
• स्वभाव: अशुभ
• स्वामी ग्रह: शनि (Shani)
• फल: विलंब, संरचनात्मक दबाव, वित्तीय अनुशासन, स्वास्थ्य बाधाएं और भारी जिम्मेदारियां। यह सहनशक्ति की परीक्षा लेती है और नैतिक कठिन परिश्रम की मांग करती है।

7. सिद्धा (शुक्र) — 7 वर्ष
• स्वभाव: अत्यंत शुभ
• स्वामी ग्रह: शुक्र (Shukra)
• फल: उच्च विलासिता, रोमांटिक संतुष्टि, कलात्मक उपलब्धियां, भौतिक समृद्धि, विवाह और व्यक्तिगत लोकप्रियता।

8. संकटा (राहु) — 8 वर्ष
• स्वभाव: अत्यंत अशुभ
• स्वामी ग्रह: राहु (Rahu)
• फल: अप्रत्याशित बदलाव, अचानक बाधाएं, भ्रम, कानूनी/वित्तीय जोखिम या भारी मनोवैज्ञानिक दबाव। यह एक बड़े कार्मिक रीसेट काल के रूप में कार्य करता है।

संपूर्ण नक्षत्र आवंटन तालिका

चक्र 1: आर्द्रा से हस्त

1. मंगला (चंद्रमा — 1 वर्ष): आर्द्रा
2. पिंगला (सूर्य — 2 वर्ष): पुनर्वसु
3. धान्या (बृहस्पति — 3 वर्ष): पुष्य
4. भ्रामरी (मंगल — 4 वर्ष): आश्लेषा
5. भद्रिका (बुध — 5 वर्ष): मघा
6. उल्का (शनि — 6 वर्ष): पूर्वाफाल्गुनी
7. सिद्धा (शुक्र — 7 वर्ष): उत्तराफाल्गुनी
8. संकटा (राहु — 8 वर्ष): हस्त

चक्र 2: चित्रा से उत्तराषाढ़ा

1. मंगला (चंद्रमा — 1 वर्ष): चित्रा
2. पिंगला (सूर्य — 2 वर्ष): स्वाति
3. धान्या (बृहस्पति — 3 वर्ष): विशाखा
4. भ्रामरी (मंगल — 4 वर्ष): अनुराधा
5. भद्रिका (बुध — 5 वर्ष): ज्येष्ठा
6. उल्का (शनि — 6 वर्ष): मूल
7. सिद्धा (शुक्र — 7 वर्ष): पूर्वाषाढ़ा
8. संकटा (राहु — 8 वर्ष): उत्तराषाढ़ा

चक्र 3: श्रवण से मृगशिरा

1. मंगला (चंद्रमा — 1 वर्ष): श्रवण
2. पिंगला (सूर्य — 2 वर्ष): धनिष्ठा
3. धान्या (बृहस्पति — 3 वर्ष): शतभिषा
4. भ्रामरी (मंगल — 4 वर्ष): पूर्वाभाद्रपद
5. भद्रिका (बुध — 5 वर्ष): उत्तराभाद्रपद
6. उल्का (शनि — 6 वर्ष): रेवती
7. सिद्धा (शुक्र — 7 वर्ष): अश्विनी
8. संकटा (राहु — 8 वर्ष): भरणी

शेष नक्षत्र (27 नक्षत्रों को पूर्ण करते हुए)

1. मंगला (चंद्रमा — 1 वर्ष): कृत्तिका
2. पिंगला (सूर्य — 2 वर्ष): रोहिणी
3. धान्या (बृहस्पति — 3 वर्ष): मृगशिरा

प्रारंभिक योगिनी दशा की गणना कैसे करें

योगिनी दशा कैलकुलेटर

इसकी गणना सीधे आपके जन्म नक्षत्र (जन्म नक्षत्र) से की जाती है:

1. नक्षत्र संख्या ज्ञात करें: अपने जन्म के चंद्रमा के नक्षत्र की गणना अश्विनी (1) से रेवती (27) तक करें।

2. 3 जोड़ें: अपने नक्षत्र की संख्या लें और उसमें 3 जोड़ें।

3. 8 से भाग दें: इस योग को 8 से भाग दें।

4. शेषफल ज्ञात करें: शेषफल जन्म के समय सक्रिय प्रारंभिक योगिनी को दर्शाता है:

1 = मंगला (चंद्रमा)
2 = पिंगला (सूर्य)
3 = धान्या (बृहस्पति)
4 = भ्रामरी (मंगल)
5 = भद्रिका (बुध)
6 = उल्का (शनि)
7 = सिद्धा (शुक्र)
0 (या 8) = संकटा (राहु)

ज्योतिषी योगिनी दशा का उपयोग क्यों करते हैं

तेज़ गति से आकलन (Fast-Paced Tracking): चूंकि यह पूरा चक्र हर 36 वर्षों में दोहराया जाता है, इसलिए एक व्यक्ति अपने सामान्य जीवनकाल में प्रत्येक प्रमुख योगिनी चरण का कई बार अनुभव करता है, जिससे जीवन के पैटर्न को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।

विंशोत्तरी दशा के लिए दोहरा सत्यापन (Double-Check): जब विंशोत्तरी दशा में किसी घटना (जैसे विवाह, करियर में बदलाव या स्थान परिवर्तन) का संकेत मिलता है, तो उसी के अनुरूप योगिनी दशा का चरण (जैसे, सिद्धा या धान्या) एक शक्तिशाली क्रॉस-कन्फर्मेशन (दोहरे सत्यापन) के रूप में कार्य करता है।

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