नवग्रह और उनके मुख्य रत्न

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वैदिक ज्योतिष (Jyotish) में, रत्न सटीक भौतिक ट्रांसमीटर के रूप में कार्य करते हैं, जो धारणकर्ता के सूक्ष्म शरीर को नौ प्राथमिक ग्रहों द्वारा उत्सर्जित लौकिक आवृत्तियों के साथ संरेखित करते हैं।

नवग्रह और उनके मुख्य रत्न

1. सूर्य (Surya) — माणिक (Ruby)
धातु: सोना या तांबा
उंगली: अनामिका (Ring Finger)
कारकत्व: नेतृत्व, जीवन शक्ति, अधिकार, आत्म-सम्मान और आत्मिक प्रेरणा।
उपरत्न: लाल गारनेट, सनस्टोन।

2. चंद्रमा (Chandra) — प्राकृतिक मोती (Natural Pearl)
धातु: चांदी
उंगली: कनिष्ठिका (Little Finger) या अनामिका (Ring Finger)
कारकत्व: भावनात्मक शांति, मानसिक स्पष्टता, अंतर्ज्ञान और मातृ ऊर्जा।
उपरत्न: मूनस्टोन, सफेद पुखराज (White Sapphire)।

3. मंगल (Mangal) — लाल मूंगा (Red Coral)
धातु: तांबा, सोना या पीतल
उंगली: अनामिका (Ring Finger)
कारकत्व: शारीरिक ऊर्जा, साहस, महत्वाकांक्षा, सहनशक्ति और तकनीकी कौशल।
उपरत्न: कार्नेलियन, लाल जैस्पर।

4. बुध (Budh) — पन्ना (Emerald)
धातु: सोना या चांदी
उंगली: कनिष्ठिका (Little Finger)
कारकत्व: संवाद कौशल, बुद्धि, व्यावसायिक समझ, स्मरण शक्ति और विश्लेषणात्मक प्रतिभा।
उपरत्न: हरा टूमलाइन, पेरिडॉट, त्सवोराइट।

5. बृहस्पति (Guru) — पीला पुखराज (Yellow Sapphire)
धातु: सोना या पीतल
उंगली: तर्जनी (Index Finger)
कारकत्व: ज्ञान, उच्च विद्या, धन, भाग्य, संतान और आध्यात्मिक विकास।
उपरत्न: पीला पुखराज विकल्प (Yellow Topaz), हेलियोडोर, सिट्रीन।

6. शुक्र (Shukra) — हीरा (Diamond)
धातु: प्लैटिनम, सफेद सोना या चांदी
उंगली: मध्यमा (Middle Finger) या कनिष्ठिका (Little Finger)
कारकत्व: विलासिता, वैवाहिक सुख, कलात्मक रचनात्मकता, संबंधों में सामंजस्य और परिष्कृत अभिरुचि।
उपरत्न: ओपल, सफेद पुखराज, जरकन (Zircon)।

7. शनि (Shani) — नीलम (Blue Sapphire)
धातु: लोहा, सीसा या चांदी
उंगली: मध्यमा (Middle Finger)
कारकत्व: अनुशासन, करियर में वृद्धि, सहनशीलता, न्याय और मोह-माया से विरक्ति।
उपरत्न: कटेला (Amethyst), आयोलाइट (काका नीली), नीला स्पिनल।

8. राहु (North Node) — गोमेद (Hessonite / Garnet)
धातु: चांदी या पंचधातु (5 धातुओं का मिश्रण)
उंगली: मध्यमा (Middle Finger)
कारकत्व: नवाचार, वैश्विक स्तर पर अवसर, उच्च महत्वाकांक्षाएं, लीक से हटकर सोच और तकनीक।
उपरत्न: नारंगी-भूरा जरकन।

9. केतु (South Node) — लहसुनिया (Chrysoberyl Cat’s Eye)
धातु: चांदी या पंचधातु
उंगली: अनामिका (Ring Finger) या मध्यमा (Middle Finger)
कारकत्व: गहरा अंतर्ज्ञान, आध्यात्मिक मोक्ष, शोध क्षमता और मनोवैज्ञानिक दृष्टि।
उपरत्न: रेशेदार क्वार्ट्ज कैट्स आई, एपेटाइट।

वैदिक रत्न धारण करने के आवश्यक नियम

कारक बनाम मारक: रत्न आमतौर पर कमजोर या मारक भावों के स्वामियों के बजाय कार्यात्मक शुभ ग्रहों (योगकारक या शुभ भावों के स्वामी) के लिए ही पहने जाने चाहिए। शुद्धिकरण और प्राण-प्रतिष्ठा: धारण करने से पहले, रत्न को पारंपरिक रूप से दूध/जल से शुद्ध किया जाता है और उसके अनुकूल ग्रहीय काल (होरा) के दौरान ग्रह के विशिष्ट वैदिक मंत्र से अभिमंत्रित किया जाता है।

रत्न की गुणवत्ता: रत्न प्राकृतिक, अनुपचारित (untreated), आंखों से देखने पर स्पष्ट रूप से शुद्ध होना चाहिए और अंगूठी या लॉकेट में जड़े होने पर सीधे त्वचा को स्पर्श करना चाहिए।

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आगे पढ़ें: वैदिक ज्योतिष में रत्न धारण करने के क्या करें और क्या न करें