इंसानों की तरह ही, ग्रहों के भी मित्र (Mitra), शत्रु (Shatru) और तटस्थ यानी सम (Sama) साथी होते हैं। ग्रहों की इस परस्पर मित्रता को समझना यह जानने के लिए बेहद आवश्यक है कि जब वे एक ही भाव में साथ बैठते हैं (युति / Conjunction) या एक-दूसरे पर अपनी दृष्टि (Drishti) डालते हैं, तो उनका व्यवहार कैसा होता है।
मुख्य सूची: मित्र, शत्रु और सम ग्रह
1. सूर्य (The Sun) — राजा
• मित्र (Mitra): चंद्रमा (Chandra), मंगल (Mangal), बृहस्पति (Guru)• शत्रु (Shatru): शनि (Shani), शुक्र (Shukra), राहु, केतु
• सम (Sama): बुध (Budh)
2. चंद्रमा (The Moon) — रानी
• मित्र (Mitra): सूर्य (Surya), बुध (Budh)• शत्रु (Shatru): कोई नहीं (चंद्रमा किसी भी ग्रह को अपना प्रत्यक्ष शत्रु नहीं मानता!)
• सम (Sama): मंगल (Mangal), बृहस्पति (Guru), शुक्र (Shukra), शनि (Shani)
3. मंगल (Mars) — सेनापति
• मित्र (Mitra): सूर्य (Surya), चंद्रमा (Chandra), बृहस्पति (Guru)• शत्रु (Shatru): बुध (Budh)
• सम (Sama): शुक्र (Shukra), शनि (Shani)
4. बुध (Mercury) — राजकुमार
• मित्र (Mitra): सूर्य (Surya), शुक्र (Shukra)• शत्रु (Shatru): चंद्रमा (Chandra)
• सम (Sama): मंगल (Mangal), बृहस्पति (Guru), शनि (Shani)
5. गुरु / बृहस्पति (Jupiter) — गुरु
• मित्र (Mitra): सूर्य (Surya), चंद्रमा (Chandra), मंगल (Mangal)• शत्रु (Shatru): बुध (Budh), शुक्र (Shukra)
• सम (Sama): शनि (Shani)
6. शुक्र (Venus) — राजनयिक / मंत्री
• मित्र (Mitra): बुध (Budh), शनि (Shani), राहु• शत्रु (Shatru): सूर्य (Surya), चंद्रमा (Chandra)
• सम (Sama): मंगल (Mangal), बृहस्पति (Guru)
7. शनि (Saturn) — न्यायाधीश
• मित्र (Mitra): बुध (Budh), शुक्र (Shukra), राहु• शत्रु (Shatru): सूर्य (Surya), चंद्रमा (Chandra), मंगल (Mangal)
• सम (Sama): बृहस्पति (Guru)
8. राहु (North Node) — नवप्रवर्तक
• मित्र (Mitra): शुक्र (Shukra), शनि (Shani), बुध (Budh)• शत्रु (Shatru): सूर्य (Surya), चंद्रमा (Chandra), मंगल (Mangal)
• सम (Sama): बृहस्पति (Guru)
9. केतु (South Node) — रहस्यवादी
• मित्र (Mitra): मंगल (Mangal), शुक्र (Shukra), शनि (Shani)• शत्रु (Shatru): सूर्य (Surya), चंद्रमा (Chandra)
• सम (Sama): बुध (Budh), बृहस्पति (Guru)
कुंडली विश्लेषण में ग्रहों की मित्रता क्यों महत्वपूर्ण है
• जब मित्र ग्रह एक साथ बैठते हैं: वे एक-दूसरे के सकारात्मक गुणों को बढ़ाते हैं और शुभ परिणाम (शुभ योग / Subha Yogas) निर्मित करते हैं।• जब शत्रु ग्रह एक साथ बैठते हैं: वे तनाव, घर्षण या आंतरिक संघर्ष पैदा करते हैं (दोष / Doshas या ग्रहण योग / Grahan Yogas)। उदाहरण के लिए, सूर्य-शनि की युति अहंकार और प्रतिबंध को एक साथ लाती है, जिसे संतुलित करने के लिए सचेत प्रयास की आवश्यकता होती है।
• शत्रु राशि में स्थिति: यदि कोई ग्रह अपने शत्रु की राशि में बैठता है (जैसे, शनि के स्वामित्व वाली मकर राशि में सूर्य), तो वह असहज और सीमित महसूस करता है, ठीक वैसे ही जैसे किसी ऐसे व्यक्ति के घर में रहना जिसके साथ आपकी नहीं बनती।
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